Mātrikā Shaktis & Shree Ganesh
In a nicely written article on Mātrikā mantras (https://manblunder.com/articlesview/matrika-mantras), this blogger writes about the concept of mātrikās. “…Mātrikā refers to the subtle form of speech (not actual physical speech). Mātrikā deities are associated with every letter of the sanskrit albhabet and represent a certain energy or set of energies related to each alphabet. Mātrikā shaktis encompass all aspects of creation, maintenance and destruction, and are omnipresent. In tantric aspect, they constitute all mantras and are the power behind all bīja syllables. Mātrikā are deposited in various parts of human body and their invocation activates subtle chakras and energy centres within the body. The Mātrikās are also part of Tantric nyāsas (placement of mantras in various body parts) and are required for fructification of mantra shakti for wish fulfilment (material or spritual)“. This also explains the inherent power behind sanskrit mantras and the utility of chanting them without even really knowing the meaning. The power manifests by repetition, simply by virtue of the Mātrikā shakti present in the alphabets/syllables.
In the Gānapatya tradition of Shree Ganapati worship (many of it tantric), Mātrikā nyāsa with the 51 shaktis is also a very important part of the process of activating Shree Ganesh’s various powerful mantras. Here is the list of the 51 Shakti infused Ganesh Mātrikās as part of nyāsa.
ऐं ह्रीं श्रीं अँ श्रीयुक्ताय विघ्नेशाय नमः, शिरसि | 1
ऐं ह्रीं श्रीं आँ ह्रींयुक्ताय विघ्नराजाय नमः, मुखवृत्ते | 2
ऐं ह्रीं श्रीं इँ तुष्टियुक्ताय विनायकाय नमः, दक्षनेत्रे | 3
ऐं ह्रीं श्रीं ईँ शान्तियुक्ताय शिवोत्तमाय नमः, वामनेत्रे | 4
ऐं ह्रीं श्रीं उँ पुष्टियुक्ताय विघ्नहृते नमः, दक्षकर्णे | 5
ऐं ह्रीं श्रीं ऊँ सरस्वतीयुक्ताय विघ्नकर्त्रे नमः, वामकर्णे | 6
ऐं ह्रीं श्रीं ऋँ रतीयुक्ताय विघ्नराजे नमः, दक्षनासापुटे | 7
ऐं ह्रीं श्रीं ॠँ मेधायुक्ताय गणनायकाय नमः, वामनासापुटे | 8
ऐं ह्रीं श्रीं ऌँ कान्तियुक्ताय एकदन्ताय नमः, दक्षगण्डे | 9
ऐं ह्रीं श्रीं ॡँ कामिनीयुक्ताय द्विदन्ताय नमः, वामगण्डे | 10
ऐं ह्रीं श्रीं एँ मोहिनीयुक्ताय गजवक्त्राय नमः, ऊर्ध्वोष्ठे | 11
ऐं ह्रीं श्रीं ऐं जटायुक्ताय निरञ्जनाय नमः, अधरोष्ठे | 12
ऐं ह्रीं श्रीं ओँ तीव्रायुक्ताय कपर्दभृते नमः, ऊर्ध्वदंतपङ्क्तौ | 13
ऐं ह्रीं श्रीं औँ ज्वालिनीयुक्ताय दीर्घमुखाय नमः, अधोदंतपङ्क्तौ | 14
ऐं ह्रीं श्रीं अँ नन्दायुक्ताय शङ्कुकर्णाय नमः, जिव्हाग्रे | 15
ऐं ह्रीं श्रीं अः सुरसायुक्ताय वृषध्वजाय नमः, कण्ठे | 16
ऐं ह्रीं श्रीं कँ कामरूपिणीयुक्ताय गणनाथाय नमः, दक्ष्यबाहुमूले | 17
ऐं ह्रीं श्रीं खँ सुभ्रूयुक्ताय गजेन्द्राय नमः, दक्षकूर्परे | 18
ऐं ह्रीं श्रीं गँ जयिनीयुक्ताय शूर्पकर्णाय नमः, दक्षमणिबन्धे | 19
ऐं ह्रीं श्रीं घँ सत्यायुक्ताय त्रिलोचनाय नमः, दक्षकरांगगुलीमूले | 20
ऐं ह्रीं श्रीं ङँ विघ्नेशीयुक्ताय लम्बोदराय नमः, दक्षकरांगगुल्यग्रे | 21
ऐं ह्रीं श्रीं चँ सुरूपायुक्ताय महानादाय नमः, वामबाहुमूले | 22
ऐं ह्रीं श्रीं छँ कामदायुक्ताय चतुरमूर्तये नमः, वामकूर्परे | 23
ऐं ह्रीं श्रीं जँ मदविह्वलायुक्ताय सदाशिवाय नमः, वाममणिबन्धे | 24
ऐं ह्रीं श्रीं झँ विकटायुक्ताय आमोदाय नमः, वामकरांगगुलीमूले | 25
ऐं ह्रीं श्रीं ञँ पूर्णायुक्ताय दुर्मुखाय नमः, वामकरांगगुल्यग्रे | 26
ऐं ह्रीं श्रीं टँ भूतिदायुक्ताय सुमुखाय नमः, दक्षोरुमूले | 27
ऐं ह्रीं श्रीं ठँ भूमियुक्ताय प्रमोदाय नमः, दक्षजानुनी | 28
ऐं ह्रीं श्रीं डँ शक्तियुक्ताय एकपादाय नमः, दक्षगुल्फे | 29
ऐं ह्रीं श्रीं ढँ रमायुक्ताय द्विज्हिवाय नमः, दक्षपादांगगुलीमूले | 30
ऐं ह्रीं श्रीं णँ मानुषीयुक्ताय शूराय नमः, दक्षपादांगगुल्यग्रे | 31
ऐं ह्रीं श्रीं तँ मकरध्वजायुक्ताय विराय नमः, वामोरुमूले | 32
ऐं ह्रीं श्रीं थँ वीरिणीयुक्ताय षण्मुखाय नमः, वामजानुनी | 33
ऐं ह्रीं श्रीं दँ भृकुटियुक्ताय वरदाय नमः, वामगुल्फे | 34
ऐं ह्रीं श्रीं धँ लज्जायुक्ताय वामदेवाय नमः, वामपादांगगुलीमूले | 35
ऐं ह्रीं श्रीं नँ दीर्घघोणायुक्ताय वक्रतुण्डाय नमः, वामपादांगगुल्यग्रे | 36
ऐं ह्रीं श्रीं पँ धनुर्धरायुक्ताय द्वितुण्डाय नमः, दक्षपार्श्वे | 37
ऐं ह्रीं श्रीं फँ यामिनीयुक्ताय सेनान्यै नमः, वामपार्श्वे | 38
ऐं ह्रीं श्रीं बँ रात्रियुक्ताय ग्रामण्ये नमः, पृष्ठे | 39
ऐं ह्रीं श्रीं भँ चन्द्रिकायुक्ताय मत्ताय नमः, नाभौ | 40
ऐं ह्रीं श्रीं मँ शशिप्रभायुक्ताय विमत्ताय नमः, जठरे | 41
ऐं ह्रीं श्रीं यँ लोलायुक्ताय मत्तवाहनाय नमः, हृदये | 42
ऐं ह्रीं श्रीं रँ चपलायुक्ताय जटिने नमः, दक्षस्कन्धे | 43
ऐं ह्रीं श्रीं लँ ऋद्धियुक्ताय मुण्डिने नमः, गलपृष्ठे | 44
ऐं ह्रीं श्रीं वँ दुर्भगायुक्ताय खड्गिने नमः, वामस्कन्धे | 45
ऐं ह्रीं श्रीं शँ सुभगायुक्ताय वरेण्याय नमः, हृदयादि-दक्षकरांगगुल्यन्तम् | 46
ऐं ह्रीं श्रीं षँ शिवायुक्ताय वृषकेतनाय नमः, हृदयादि-वामकरांगगुल्यन्तम् | 47
ऐं ह्रीं श्रीं सँ दुर्गायुक्ताय भक्ष्यप्रियाय नमः, हृदयादि-दक्षपादांगगुल्यन्तम् | 48
ऐं ह्रीं श्रीं हँ कालीयुक्ताय गणेशाय नमः, हृदयादि-वामपादांगगुल्यन्तम् | 49
ऐं ह्रीं श्रीं ळँ कालकुब्जिकायुक्ताय मेघनादाय नमः, हृदयादिगुह्यान्तम् | 50
ऐं ह्रीं श्रीं क्षँ विघ्नहारिणीयुक्ताय गणेश्वराय नमः, हृदयादिमूर्धान्तम् | 51